Advertisement

संभावना गतिविधि में नृत्य एवं गायन प्रस्तुति हुई

भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य,गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि “संभावना” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 08 फरवरी, 2026 को महेश मालवीय एवं साथी, राजगढ़ द्वारा कबीर गायन, श्री विनोद सेन एवं साथी, दतिया द्वारा लांगुरिया गायन, देवी भजन एवं राखी बांके एवं साथी, भोपाल द्वारा गणगौर नृत्य, कृष्णा मालीवाड एवं साथी, धार द्वारा भगोरिया नृत्य की प्रस्तुति दी गई। 

भगोरिया नृत्य

मध्यप्रदेश के मालवा एवं झाबुआ और अलीराजपुर क्षेत्र में निवास करने वाली भील जनजाति का भगोरिया नृत्य, भगोरिया हाट में होली तथा अन्य अवसरों पर भील युवक-युवतियों द्वारा किया जाता है। फागुन के मौसम में होली से पूर्व भगोरिया हाटों का आयोजन होता है। भगोरिया नृत्य में विविध पदचाप समूहन पाली, चक्रीपाली तथा पिरामिड नृत्य मुद्राएं आकर्षण की केन्द्र होती हैं। रंग-बिरंगी वेशभूषा में सजी-धजी युवतियों का श्रृंगार और हाथ में तीरकमान लिये नाचना ठेठ पारम्परिक व अलौकिक सरंचना है।

गणगौर

गणगौर निमाड़ी जन-जीवन का गीति काव्य है। चैत्र दशमी से चैत्र सुदी तृतीया तक पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस गणगौर उत्सव का ऐसा एक भी कार्य नहीं, जो बिना गीत के हो। गणगौर के रथ सजाये जाते हैं, रथ दौड़ाये जाते हैं। इसी अवसर पर गणगौर नृत्य भी किया जाता है। झालरिया दिये जाते हैं। महिला और पुरूष रनुबाई और धणियर सूर्यदेव के रथों को सिर पर रखकर नाचते हैं। ढोल और थाली वाद्य गणगौर के केन्द्र होते हैं। गणगौर निमाड़ के साथ राजस्थान, गुजरात, मालवा में भी उतना ही लोकप्रिय है।

मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय़ में हर रविवार दोपहर 02 बजे से आयोजित होने वाली इस गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *