भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय द्वारा प्रदेश के जनजातीय चित्रकारों को चित्र प्रदर्शनी और चित्रों की बिक्री के लिये सार्थक मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रतिमाह ‘लिखन्दरा प्रदर्शनी दीर्घा’ में किसी एक जनजातीय चित्रकार की प्रदर्शनी सह विक्रय का संयोजन शलाका नाम से किया जाता है। इसी क्रम में 03 अप्रैल, 2026 से गोण्ड जनजातीय चित्रकार प्रदीप मरावी के चित्रों की प्रदर्शनी सह-विक्रय का संयोजन किया गया है। 72वीं शलाका चित्र प्रदर्शनी 30 अप्रैल, 2026 (मंगलवार से रविवार) तक निरंतर रहेगी।
48 वर्षीय प्रदीप मरावी पारम्परिक गोण्ड चित्रकला की वर्तमान पीढ़ी के प्रतिभाशाली चित्रकार हैं। आपका जन्म ग्राम गारकामट्टा, जिला डिण्डोरी में हुआ। आपके पिता श्री श्रीपति मरावी खेती-किसानी करते हैं। जंगल-पहाड़ों के बीच आप पले-बढ़े और बचपन गुजरा है। स्थानीय गाँव और नजदीकी कस्बे से आपने 10वीं तक औपचारिक शिक्षा हासिल की है। पढ़ाई के साथ-साथ आप पारिवारिक खेती में भी सहायता करते रहे।
आप विवाहित हैं। आपकी पत्नी श्रीमती धनेश्वरी मरावी भी गोण्ड चित्रकार हैं। आपके दोनों बच्चे भी समय-समय पर आपके चित्रकर्म में सहायता करते हैं। लगभग ढाई दशक पूर्व जब आप रोजगार की तलाश में भोपाल आये थे, तब से आप यहीं रहकर चित्रकारी कर रहे हैं। भोपाल में ही अपने मामा-मामी प्रख्यात गोण्ड चित्रकार श्री सुभाष व्याम एवं श्रीमती दुर्गाबाई व्याम के सान्निध्य में रहते हुए आपने इस पारंपरिक कला की बारीकियों को सीखा और समझा। फिर धीरे-धीरे उन्हीं के मार्गदर्शन और सहयोग से स्वतंत्र रूप से भी चित्रकला कर्म करने लगे।
आपने दिल्ली, मुम्बई, बैंगलोर, भोपाल सहित देश-प्रदेश के कुछ प्रसिद्ध कला-दीर्घायों में एकल एवं संयुक्त चित्रकला प्रदर्शनियों में प्रतिभागिता की है। आप अपनी सफलता का श्रेय अपने मामा-मामी द्वय को ही देते हैं, जिनके प्रारम्भिक मार्गदर्शन ने आपकी कला को सुघड़ बनाया। आपके चित्रों में जंगल-पहाड़ों के जीवन के साथ ही साथ गोण्ड आख्यानों और जनजातीय रीति-रिवाजों के विभिन्न पक्ष विशेषकर द्रष्टव्य होते हैं।

















Leave a Reply