उज्जैन : बुधवार को महाकाल की नगरी से काशी विश्वनाथ की भूमि पर सम्राट विक्रमादित्य के नाट्य मंचन के लिए 150 से अधिक सदस्यों का दल काशी-महाकाल एक्सप्रेस ट्रेन से वाराणसी के लिए रवाना हुआ। रेल्वे स्टेशन पर नाट्य दल में शामिल कलाकारों का वरिष्ठ समाजसेवियों द्वारा पुष्पहार से स्वागत कर शुभकामनाओं के साथ बिदाई दी।
भारत के स्वाभिमान, नवजागरण और सांस्कृतिक वैभव की गौरवशाली यात्रा को समर्पित महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन 3 से 5 अप्रैल तक बी.एल.डब्ल्यू. मैदान, वाराणसी में किया जाएगा। सम्राट विक्रमादित्य की गाथा मंच पर साकार करने के लिए उज्जैन से कलाकारों एवं तकनीकी दल का जत्था बुधवार दोपहर 11 बजे काशी – महाकाल एक्सप्रेस से वाराणसी के लिए रवाना हुआ।
इस भव्य आयोजन में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, पराक्रम, न्यायप्रियता एवं सांस्कृतिक योगदान को प्रभावशाली मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही कार्यक्रम स्थल पर विविध प्रदर्शिनियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी, जिनमें ‘आर्ष भारत’, ‘सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या’, ‘शिव पुराण’, ‘चौरासी महादेव’, ‘श्रीहनुमान’ तथा मध्यप्रदेश के पवित्र स्थलों की झलक प्रस्तुत की जाएगी। श्री भस्म रमैया भक्त मंडल के 50 कलाकार द्वारा डमरू वादन की प्रस्तुति दी जाएगी।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक पूर्वरंग के अंतर्गत मध्यप्रदेश के लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं “स्वाद” खंड में देशज व्यंजनों का विशेष मेला भी आयोजित किया जाएगा, जो दर्शकों को भारतीय परंपरा और संस्कृति का जीवंत अनुभव कराएगा।
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन के तत्वावधान तथा जिला प्रशासन वाराणसी के सहयोग से 3 से 5 अप्रैल तक विक्रम उत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है।
उज्जैन रेल्वे स्टेशन पर प्रख्यात कवि श्री दिनेश दिग्गज ने नाट्य दल के कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्कृति के संवाहक मध्यप्रदेश के विकास पुरुष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आज से 21 वर्ष पूर्व जो संकल्पना दी थी उसने मूर्त रुप ले लिया है। इतने बड़े स्तर पर सम्राट विक्रमादित्य नाट्य मंचन काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी से होने जा रहा है। महाकाल की नगरी से काशी विश्वनाथ की भूमि तक कला और संस्कृति को जोड़ने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संकल्पना के अनुरुप ही हो रहा है।
इस बृहद आयोजन के लिए संस्कृति विभाग और महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ के नेतृत्व में 150 से भी अधिक कलाकारों का दल बनारस के लिए रवाना हुआ है।
विशाला लोक सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष श्री राजेश सिंह कुशवाह के नेतृत्व में पूरा कार्यक्रम वाराणसी में होने जा रहा है। 03 दिवसीय उत्सव के लिए उज्जैन के कलाकारों का दल नाट्य मंचन के लिए रवाना हुआ है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है।
शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस महानाट्य के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के ‘शकारि’ और ‘साहसांक’ बनने की प्रेरणादायक गाथा को भव्य मंचन के जरिए जीवंत किया जाएगा।
नाटक में यह दर्शाया जाएगा कि किस प्रकार एक लोक-कल्याणकारी और न्यायप्रिय शासक ने अपने राजकोष से धन देकर प्रजा को ऋणमुक्त किया तथा एक ऐसे आदर्श साम्राज्य की स्थापना की, जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी।
महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य की ‘नवरत्न’ परंपरा को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे महान विद्वानों की उपस्थिति के माध्यम से ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति से समृद्ध ‘श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण के संकल्प को सशक्त रूप में बताया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इस महानाट्य का सफल मंचन दिल्ली के लाल किले पर हो चुका है, जहाँ इसे व्यापक सराहना मिली थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसकी प्रशंसा के पश्चात अब वाराणसी में होने वाला यह आयोजन सांस्कृतिक दृष्टि से एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान विविध प्रदर्शिनियाँ, मध्यप्रदेश के लोकनृत्य तथा देशज व्यंजनों का विशेष मेला आकर्षण का केंद्र रहेंगे, जो दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा से अवगत कराएंगे।

















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