भोपाल। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, भोपाल इकाई के तत्वावधान में 15 मार्च 2026 को विश्व संवाद केंद्र, शिवाजी नगर, भोपाल में संघ साहित्य पर केंद्रित एक विशेष परिचर्चा तथा होली विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में संघ साहित्य की वैचारिक परंपरा, उसके ऐतिहासिक संदर्भ और समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार रमेश व्यास शास्त्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने “ज्योति जला निज प्राण की” पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कृति संघ के कार्यकर्ता के तपस्वी जीवन को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जीवन जीने की कला सीखनी हो तो संघ साहित्य को गहराई से पढ़ना चाहिए। संगठन व्यक्ति को ‘अहम’ से ‘वयम्’ की यात्रा सिखाता है।
विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीलिमा रंजन ने अपने वक्तव्य में “व्यास महाभारत में द्रौपदी” पुस्तक का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कृति द्रौपदी के गुणों को समर्पित है। द्रौपदी साहस, ओज और समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं तथा वे नारी अस्मिता की प्रतीक रही हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. नुसरत मेहदी, अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, भोपाल इकाई एवं निदेशक, मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पुस्तक “आनंदमठ” और श्रीधर पराड़कर की कृति “खंडोबल्लाल” पर चर्चा करते हुए कहा कि “आनंदमठ” के माध्यम से बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने भारतीय साहित्य में राष्ट्रचेतना का एक सशक्त स्वर प्रस्तुत किया। उपन्यास का प्रसिद्ध गीत “वन्दे मातरम्” स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रेरक प्रतीक बना।
इसी क्रम में “खंडोबल्लाल” पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लेखक श्रीधर पराड़कर ने मराठा इतिहास के एक उपेक्षित किन्तु प्रेरक चरित्र को सामने लाकर यह दिखाया है कि राष्ट्र का निर्माण केवल महान शासकों से नहीं, बल्कि उनके साथ खड़े समर्पित सहयोगियों के त्याग और निष्ठा से भी होता है।
यह गोष्ठी कीर्तिशेष साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु की स्मृति को समर्पित रही। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने बीज वक्तव्य में परिषद की महामंत्री श्रीमती सुनीता यादव ने परिषद के प्रमुख कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा रेणु जी के साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए कहा कि “मैला आँचल” आंचलिक साहित्य की सर्वोत्तम कृतियों में से एक है। उन्होंने यह भी बताया कि रेणु जी की प्रसिद्ध कहानी “मारे गये गुलफाम” पर आधारित फिल्म “तीसरी कसम” भी बनी है।
गोष्ठी का संचालन श्रीमती प्रतिभा श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में कुमकुम गुप्ता, ममता बाजपेयी, कमल किशोर दुबे, रीतेश जैन, राजेश विश्वकर्मा, प्रतीक द्विवेदी, होशियार सिंह पटेल, नीता सक्सेना और पुरुषोत्तम तिवारी सहित अनेक साहित्यकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत मार्च माह की नियमित काव्य गोष्ठी भी आयोजित की गई, जिसमें उपस्थित कवियों ने होली विषयक कविताओं का पाठ कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
अंत में डॉ. नुसरत मेहदी ने सभी साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।














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