Advertisement

73वीं शलाका जनजातीय चित्र प्रदर्शनी 30 मई

भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय द्वारा प्रदेश के जनजातीय चित्रकारों को चित्र प्रदर्शनी और चित्रों की बिक्री के लिये सार्थक मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से प्रतिमाह ‘लिखन्दरा प्रदर्शनी दीर्घा’ में किसी एक जनजातीय चित्रकार की प्रदर्शनी सह विक्रय का संयोजन शलाका नाम से किया जाता है। इसी क्रम में 03 मई, 2026 से भील जनजातीय चित्रकार सुनीता भावोर के चित्रों की प्रदर्शनी सह-विक्रय का संयोजन किया गया है। 73वीं शलाका चित्र प्रदर्शनी 30 मई, 2026 (मंगलवार से रविवार) तक निरंतर रहेगी।

बत्तीस वर्षीय युवा भीली चित्रकार सुनीता भावोर का जन्म मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल झाबुआ जिले के एक छोटे से ग्राम कुन्दनपुर, भांडाखेड़ा में हुआ, जो कि मध्यप्रदेश की सुदूर पश्चिम की सीमा से सटा हुआ है। कृषक पिता खुमानसिंह की चार संतानों में आप दूसरे नम्बर की हैं। जंगल-पहाड़ों से घिरे ग्रामीण वातावरण और प्रकृति के सान्निध्य में आपका बचपन गुजरा। आपने मात्र प्राथमिक स्तर तक की शिक्षा प्राप्त की है, क्योंकि इसके आगे की शिक्षा के लिए आस-पास कोई स्कूल नहीं था।

आपका विवाह वर्ष 2009 में अनिल भावोर के साथ हुआ और आपके दो बच्चे हैं। वर्तमान में आप अपने पति के साथ भोपाल में रहकर ही चित्रकला कर्म में निरंतर सृजनरत हैं। आपके पति अनिल भावोर भी भीली चित्रकला के चर्चित कलाकार हैं। विवाह के पश्चात् आपने अपनी छोटी बहन संगीता ताहेड़ के सान्निध्य और मार्गदर्शन में भीली चित्रकला की बारीकियों को जाना-समझा और सीखा तथा कुछ समय तक उनके सहायक के रूप में कार्य भी किया। विख्यात भीली चित्रकार पद्मश्री भूरीबाई और श्रीमती लाडोबाई आपके पारिवारिक रिश्ते में लगती हैं। उनके चित्रकर्म से भी आप अत्यन्त प्रेरित और प्रभावित हैं।

आप चित्रकर्म में स्वतंत्र रूप से एवं अपने पति के साथ सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। आपने नयी दिल्ली, इंदौर सहित देशभर में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनियों में भाग लिया है। आपके चित्रों में जंगल-पहाड़, पशु-पक्षी के साथ जनजातीय संस्कार विशेष तौर पर द्रष्टव्य होते हैं। आप अपनी सफलता का सम्पूर्ण श्रेय अपनी छोटी बहन संगीता ताहेड़ को देती हैं, जिनकी सतत् प्रेरणा और मार्गदर्शन ने आपकी चित्रकला को सुघड़ बनाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *