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संभावना गतिविधि में नृत्य एवं गायन की प्रस्तुति हुई

भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य,गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि “संभावना” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 03 मई, 2026 को रोशनी भार्वे एवं साथी, डिण्डोरी द्वारा गोण्ड जनजातीय करमा-सैला नृत्य, संजय महाजन एवं साथी, बड़वाहा द्वारा गणगौर नृत्य, लोकेश माल एवं साथी, उज्जैन द्वारा मालवी गायन, राजकुमार सिंह ठाकुर एवं साथी, सागर द्वारा बुन्देली गायन की प्रस्तुति दी गई।

गतिविधि में लोकेश माल एवं साथी, उज्जैन द्वारा मालवी गायन में प्यारो लागे रे म्हारो मालवो देश…, रेसमियो रूमाल बलम…,भेरूजी …, जमाई गीत…, भारत देश है प्यारो…, गीतों की प्रस्तुति दी गई। वहीं राजकुमार सिंह ठाकुर एवं साथी, सागर द्वारा बुन्देली गायन में काये जाबे कोनऊ के द्वारा में…, राखे रहियो मोरी खबरिया…, हम सांची बात बताये…, तुमाये इते आके…, जैसे कई लोक गीतों की प्रस्तुति दी।

गोण्ड जनजातीय करमा नृत्य

करमा कर्म की प्रेरणा देने वाला नृत्य है। ग्रामवासियों में श्रम का महत्व है श्रम को ही ये कर्म देवता के रूप में मानते हैं। पूर्वी मध्यप्रदेश में कर्म पूजा का उत्सव मनाया जाता है। उसमें करमा नृत्य किया जाता है परन्तु विन्ध्य और सतपुड़ा क्षेत्र में बसने वाले जनजातीय कर्म पूजा का आयोजन नहीं करते। नृत्य में युवक-युवतियाँ दोनों भाग लेते हैं, दोनों के बीच गीत रचना की होड़ लग जाती है। वर्षा को छोड़कर प्रायः सभी ऋतुओं में गोंड जनजातीय करमा नृत्य करते हैं। यह नृत्य जीवन की व्यापक गतिविधि के बीच विकसित होता है, यही कारण है कि करमा गीतों में बहुत विविधता है। वे किसी एक भाव या स्थिति के गीत नहीं है उसमें रोजमर्रा की जीवन स्थितियों के साथ ही प्रेम का गहरा सूक्ष्म भाव भी अभिव्यक्त हो सकता है। मध्यप्रदेश में करमा नृत्य-गीत का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। सुदूर छत्तीसगढ़ से लगाकर मंडला के गोंड और बैगा जनजातियों तक इसका विस्तार मिलता है।

गणगौर नृत्य

गणगौर निमाड़ी जन-जीवन का गीति काव्य है। चैत्र दशमी से चैत्र सुदी तृतीया तक पूरे नौ दिनों तक चलने वाले इस गणगौर उत्सव का ऐसा एक भी कार्य नहीं, जो बिना गीत के हो। गणगौर के रथ सजाये जाते हैं, रथ दौड़ाये जाते हैं। इसी अवसर पर गणगौर नृत्य भी किया जाता है। झालरिया दिये जाते हैं। महिला और पुरूष रनुबाई और धणियर सूर्यदेव के रथों को सिर पर रखकर नाचते हैं। ढोल और थाली वाद्य गणगौर के केन्द्र होते हैं। गणगौर निमाड़ के साथ राजस्थान, गुजरात, मालवा में भी उतना ही लोकप्रिय है।

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