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सम्मान बिकते हैं,खरीदे जाते हैं

शिशिर उपाध्याय

सम्मान बिकते हैं ,खरीदे जाते हैं ,,
प्रायः इनके विज्ञापन आते हैं।।

आपकी कोई किताब होना चाहिए,
ये आपको सशुल्क बुलाते हैं ।।

शुल्कनुसार अंगवस्त्र श्रीफल होता है,
तदनुसार प्रशस्ति पत्र थमाते हैं ।।

हर शहर में दुकानें हैं सम्मानों की,
हर मौसम में वे सेल लगाते हैं।।

वैसे सितम्बर विशेष माह होता है ,,
इसमें ये गजब सितम ढाते हैं।।

बसंत की ऋतु इनकी पंजीकृत है
इसमें निराला जी को भी भुनाते हैं ।।

सामुहिक उपनयन सा संस्कार होता है
इसमें छोले पूड़ी भी खिलाते हैं ।।

माया तो महाठगिनी होती है
ऐसा “आयोजन श्री” जताते हैं ।।

“संपूर्ण साधना सम्मान” भी है
इसका ये ज्यादा रेट लगाते हैं ।।

“शिशिर ” सिफारिश की बात पर,
चाटुकारिता उपाय बताते हैं।।

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