मंदसौर : मंदसौर जिले के विकासखंड मलहारगढ़ के ग्राम कनघट्टी के प्रगतिशील कृषक श्री राजेश आर्य ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाकर न केवल अपनी खेती को लाभकारी बनाया, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। कृषि अभियांत्रिकी विभाग की ई-कृषि यंत्र अनुदान योजना के अंतर्गत श्री आर्य ने स्ट्रॉ रीपर कृषि यंत्र क्रय किया, जिसमें उन्हें लगभग 1.50 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ। इस यंत्र की मदद से वे गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेष (नरवाई) को कुशलतापूर्वक भूसे में बदल रहे हैं। पहले जहां किसान नरवाई को जलाने के लिए मजबूर होते थे, वहीं अब श्री आर्य के प्रयासों से यह समस्या समाधान में बदल गई है। वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में किसानों के खेतों से हार्वेस्टर के बाद बचे अवशेषों को नि:शुल्क साफ करते हैं और स्ट्रॉ रीपर से भूसा बनाते हैं। एक ट्रॉली भूसा बनाने पर लगभग 10 से 15 किलोग्राम गेहूं भी एकत्रित होता है, जिसे वे संबंधित किसान को लौटा देते हैं। इस पहल के कई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं— किसानों को खेत साफ करने की चिंता से मुक्ति, अतिरिक्त गेहूं की प्राप्ति, भूसे का उपयोग एवं बिक्री से आय, नरवाई जलाने की आवश्यकता समाप्त, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा, श्री आर्य द्वारा तैयार किया गया भूसा स्थानीय गौशालाओं में बेचा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है। यह पहल दर्शाती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो वे न केवल अपनी आय बढ़ा सकते हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। श्री राजेश आर्य की यह कहानी अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा है कि नवाचार और सहयोग से खेती को और अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है।
प्रगतिशील कृषक श्री राजेश आर्य की पहल: फसल अवशेष से कमाई और खेती में किया नया बदलाव

















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