Advertisement

संभावना गतिविधि में नृत्य एवं गायन प्रस्तुति हुई

भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य,गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि “संभावना” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 22 फरवरी, 2026 को श्री लाल सिंह मरकाम एंव साथी-डिण्डोरी द्वारा बैगा जनजातीय करमा नृत्य, श्री अभिषेक यादव एवं साथी-सिवनी द्वारा अहिरी नृत्य, सुश्री शिवानी सोनगरा एवं साथी-उज्जैन द्वारा मालवी गायन, सुश्री कमला लोधी एवं साथी – छतरपुर  द्वारा बुन्देली गायन की प्रस्तुति दी गई।

गतिविधि में बुन्देली गायन अंतर्गत सुश्री कमला लोधी एवं साथी – छतरपुर ने वजत आ रहे वाजना (देवी भजन), बन्ना सोवे री अटरिया (वन्नागीत),  ले चल वलम वजारिया रे…,आ जईयो लला इते होली है…, एवं अन्य गीतों का गायन। वहीं सुश्री शिवानी सोनगरा एवं साथी-उज्जैन द्वारा मालवी गायन ने  गोरी का नंद गणेश…, भरथरी प्रसंग…, सांवरिया घट माही…, फागण आयो रे…, हरि हर हरि हर…, आफू की क्यारी…, एवं अन्य लोक गीत और भजन की प्रस्तुति दी।

अहिरी नृत्य

अहिरी नृत्य अहीर समुदाय का पारम्परिक नृत्य है, जो मुख्यतः पुरूषों के द्वारा किया जाता है। इसमें विभिन्न संगीत वाद्ययंत्रों जैसे ढोल, ढोलक, नगड़िया, शहनाई और मंजीरा का उपयोग किया जाता है। यह नृत्य सामूहिक रूप से दीपावली के अवसर पर किया जाता है। इसके साथ ही अन्य खुशियों के अवसरों यथा- फसल कटाई, त्यौहारों या उत्सव के दौरान भी किया जाता है। नृत्य में विभिन्न आंगिक मुद्राओं के साथ वाद्यों की लय और ताल पर नृत्य किया जाता है।

बैगा जनजातीय करमा नृत्य

छत्तीसगढ़ी अंचल के लोक और आदिवासी समाज में करमा नृत्य किया जाता है। भादों माह की एकादशी की उपवास करके करम वृक्ष की शाखा को आंगन या चौगान में रोपित किया जाता है। दूसरे दिन नये अन्न को अपने कुल देवता को अर्पित करने के बाद नवामनका उपयोग प्रारंभ किया जाता है। नई फसल आने की खुशी में करम पूजा में हर किसी का मन मयूर नृत्य करने लगता है। करमा नृत्य गीत के प्रकार है झूमर लगड़ा लहकी ठाड़ा और रागीनी करमा इनका मूल आधार नर्तकों का अंग संचालन है। जो गीत झूम-झूमकर गाये जाते हैं वे झमर कहलाते हैं। एक पैर को झुकाकर गाये जाने वाले लंगड़ा लहराते हुए नर्तक जो गीत गाते हैं वे लहकी और राग रागनियों से सम्बद्घ रागिनी कहे जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *