नाटक “सच कहें तो” के रहस्य- रोमांच से बंधे रहे दर्शक
लखनऊ। गुनाहगार भले ही अदालत से रिहा हो जाये मगर कुदरत के इंसाफ़ से बच नहीं सकता।
अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने संस्कृति निदेशालय उ. प्र. के सहयोग से आज यहां राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में उदय नारकर के मराठी नाटक “खरं सांगायचं तर” का हिंदी रुपांतरण (डा. वसुधा सहस्त्रबुद्धे) “सच कहें तो” का शानदार मंचन किया। प्यार, धोखा, रहस्य, रोमांच और सबूतों में उलझे इस नाटक के निर्देशक थे डा. ओमेन्द्र कुमार।
“दर्पण” व “सत्यपथ” लखनऊ के सहयोग से प्रस्तुत इस नाटक में धन सम्पन्न अधेड़ अविवाहित शिरीन वाडिया अपनी सहयोगी सरस्वती बाई (दीपिका सिंह) के साथ आलीशान घर में रहती हैं। एक दिन शिरीन की मुलाकात नितिन सावरकर (विजय कुमार) से होती है। नितिन उसी शहर में छोटे से घर में रहता है, वो शादीशुदा मगर बेरोजगार है। दोनों दोबारा मिलते हैं एक सिनेमा घर में। और फिर शुरू होता है शिरीन- नितिन की बातों, मुलाकातों का सिलसिला। लेकिन इन दोनों की नज़दीकी सरस्वती को बिल्कुल पसंद नहीं। सरस्वती को नितिन की नियत पर शक होता है। शिरीन और नितिन के बीच एक रिश्ता जन्म लेने लगता है। लेकिन तभी एक दिन रहस्यमय ढंग से शिरीन वाडिया अपने घर में मृत पायी जाती हैं।
उस दिन सरस्वती छुट्टी पर है। पुलिस नितिन से पूछताछ करती है तो पता चलता है कि शिरीन की मृत्यु के दौरान नितिन वहीं था। पुलिस को नितिन पर शक है। नितिन अपनी पत्नी आयेशा (संध्या सिंह) की सलाह पर एडवोकेट कर्णिक (विजयभान) और राणे (सम्राट) से मिलता है और अपना केस लड़ने के लिए मदद मांगता है। तभी इंस्पेक्टर शिंदे (वसीम) एडवोकेट कर्णिक के ऑफिस से नितिन को गिरफ्तार कर लेता है।
नितिन के जाने के बाद आयेशा भी कर्णिक के दफ्तर आती है। आयेशा से केस के बारे में बातचीत के दौरान कुछ खुलासे होते हैं जिससे कर्णिक और राणे हतप्रभ रह जाते हैं।
अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू होती है। सरकारी वकील एडवोकेट परांजपे (महेन्द्र धुरिया) मृत शिरीन की ओर से जिरह करते हैं। नितिन की पत्नी आयेशा भी अदालत में नितिन के खिलाफ बयान देती है। सारे सबूत और गवाही नितिन के खिलाफ हैं।
केस की अगली सुनवाई के लिए तारीख दी जाती है। परांजपे को अपनी जीत और कर्णिक को हार का अंदाजा हो चुका है। कर्णिक और राणे अपने ऑफिस में बैठे तभी आफिस की सहायक रश्मि (वंदना तिवारी) बताती है कि एक रहस्यमय औरत मिलने आयी है, वो कह रही है कि उसके पास कुछ सबूत हैं जो आरोपी नितिन के लिए उपयोगी साबित होंगे। इस औरत के पास कुछ पत्र हैं जो पूरी कहानी बदल देते हैं। क्या नितिन बेगुनाह साबित होता है? क्या राज है उन पत्रों का। आखिर कौन थी वो रहस्यमय औरत?
संध्या सिंह, दीपिका सिंह, महेन्द्र धुरिया, विजय कुमार, विजयभान, सम्राट ने अपने किरदार बखूबी निभाये।
संगीत आकाश शर्मा, मंच व्यवस्था आकाश, विजय, सम्राट और प्रकाश परिकल्पना कृष्णा सक्सेना की थी।
इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी राधेश्याम सोनी, दर्पण लखनऊ के सचिव विवेक श्रीवास्तव, मोहम्मद हफीज, करुणा सागर, मुकेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
















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