मंच पर अभिनीत हुई लोक नायक खाज्या की वीर गाथा…

                1857 की क्रांति में कईं ऐसे क्रांतिवीर हुए हैं जिनके बारे में प्रमाणिक विस्तृत जानकारी न होने से वे आज भी लोक कथाओ, लोक परंपराओं में खोए हुए हैं। रंगमंच के वे लेखक, निर्देशक साधुवाद के पात्र हैं जो ऐसी वीर गाथाओं का नाट्य रूपांतरण कर दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि वे जान सके की स्वतंत्रता मात्र मट्ठी भर लोगों से नहीं मिली है बल्कि देश में कोने-कोने से वर्षों पूर्व जिन वीरों ने स्वतंत्रता प्राप्ति की अलख जलाई थी, अपने प्राण न्योछावर किये, ये उन सबकी भागीदारी  का परिणाम है,जिसके फलस्वरूप आज 15 अगस्त और गणतंत्र दिवस पर हम तिरंगा फहराते हुए गर्व करते हैं।    विशेषज्ञों का मानना है कि लोक गाथाओं में जहां प्रमाणिक तथ्यों की उपलब्धता कम होती है उन्हें नाट्य रूपांतरित करना बड़ा कठिन कार्य होता है, लेकिन पिछले दिनों शहीद भवन के सभागार में ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वहां बैठे दर्शक इस तथ्य को सिरे से नकार रहे हों।

                रविवार को मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के ऐसे ही गुमनाम वीर शहीद पर आधारित नाटक खाज्या नायक को मुझे देखने का अवसर मिला।  नाटक के लेखक, निर्देशक थे लोक कथाकार एवं रंगकर्मी प्रवीण चैबे। बहुत ही कम  लोग जानते होंगे कि प्रवीण ने लोकगीतकार एवं लोक गायक के रूप में भी प्रसिद्धि पाई है, उनके लाखों यूट्यूब फाॅलोअर्स हैं जो उनके गीतों को पसंद करते हैं।  निमाड़-मालवा एवं निकटस्थ क्षेत्रों में वैवाहिक समारोह के दौरान प्रवीण के गाए गीत – झामरू गुड्डू ताड़ी पीनऽ नाचो रे… पर लोगों को झूमते हुए देखा जा सकता है। मंच पर प्रस्तुत नाटक की कहानी को भी उन्होंने संगीत और मीठी निमाड़ी बोली के माध्यम से ऐसा पिरोया जिसमें दर्शक नाटक के माध्यम से उस काल की परम्परा को  आसानी से समझ रहे थे। महाराष्ट्र की सीमा से लगे मध्य- प्रदेश के सेंधवा शहर की नाटक सूत्रधार  श्रीगणेश की आरती- जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति … से नाटक आरंभ करती है, वह 1857 के क्रांतिवीर खाज्या नायक के बारे में दर्शकों को बताती है। खाज्या गुमान सिंह के बेटे हैं। अंग्रेजी शासन में पिता की मृत्यु के उपरांत उन्हें सेंधवा घाट का नायक बनाया जाता है। विद्रोही भीलों को घाट से भगाने के प्रयासों से खुश होकर अंग्रेजी सरकार खाज्या को 100 रूपये का इनाम देने की घोषणा करती है। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह पाती है, विद्रोहियों द्वारा छावनी में सुरक्षित सरकारी खजाना लूटने से सरकार खाज्या से नाखुश हो जाती है और उसे निलंबन का आदेश दे देती है। खाज्या विद्रोही भीलों के साथ मिलकर अंग्रेजी सरकार को सबक सिखाने का  प्रयास करता है। इस बीच निकटस्थ क्षेत्र सिलावद और ढाबा बावड़ी के भीमा नायक को खाज्या की बहन से प्रेम हो जाता है, खाज्या को इस बात का पता चलने पर वह बहन से भीमा के रिश्ते के लिए राजी हो जाता है। फिर क्या था बहन और भीमा के विवाह समारोह में मंच पर निर्देशक, गायक प्रवीण के प्रसिद्ध गीत- झामरु गुड्डू ताड़ी पीनऽ नाचो रे… पर सारे कलाकार मंच झूमते हुए दर्शकों को तात्कालिक समय की अनुभूति कराते हैं। कहानी आगे बढ़ती है-  खाज्या के दल में भीमा के सम्मिलित होने से भील विद्रोहियों की स्थिति पहले से और मजबूत हो जाती है वे साथ मिलकर अंग्रेजी सरकार के ठिकानों पर आक्रमण करने लगते हैं। जब खाज्या चेहरे पर तेज लिए अपने  विरूद्ध बाधांए दूर करने के उद्देश्य से नदी में स्नान करते हुए महामृत्युंजय जाप- त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम…… का जाप कर रहे होते है तब रचे गए एक षड्यंत्र में अंग्रेजी सरकार द्वारा भेजे रोहिद्दीन द्वारा अवसर का लाभ लेकर निर्दयतापूर्वक दागी गोली से खाज्या वीरगति को प्राप्त हो जाते हैं। मृत्यु उपरांत जनमानस द्वारा- हमरा भोला-भाला खाज्या भाई… तमक याद करांगा, तमरी बात करांगा… गीत से वीर खाज्या नायक को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। नाटक में खाज्या द्वारा द्रुत गति से लाठी चलाना, निमाड़ की वेशभूषा और निमाड़ी बोली आकर्षण के बिंदु थे, वहीं वीर सपूतों की माताएं कठिन समय होने के बावजूद स्वयं अपने पुत्रों को अंग्रेजी सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध करने के लिए प्रेरित करती हुई दिखाई देती हैं। अभिनेता इमरान अली ने खाज्या की भूमिका के साथ न्याय किया वहीं भीमा नायक की भूमिका में प्रयाग साहू गठीले और बांके युवा नजर आए।   कम साधनों में तैयार, धन्नूलाल की प्रकाश परिकल्पना, जीत एवं मनीष अहिरवार के साथ अंश और सौरभ की टीम ने  प्रस्तुति के लिए संगीत को साधा तो  प्रवीण द्वारा गाए मधुर गीतों के माध्यम से लोक गुंजन नाट्य संस्था के कलाकारों ने सीमा मोरे की रूपसज्जा से सज्जित होकर नाटक ‘वीर खाज्या नायक’ को  मंच पर अभिनीत किया और प्रस्तुति दर्शकों को भा गई।

                                                         मो.: 9425004536

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