भोपाल ।राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि संकाय, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय भोपाल द्वारा किसान सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अतिथियों, विषय विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं आसपास के विभिन्न गाँवों से पधारे किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एच.डी. वर्मा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने छात्रों एवं किसानों के लिए नवीन कृषि तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय किसान दिवस के इतिहास पर चर्चा की तथा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. ऋषिकेश मंडलोई ने किसानों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्वों, उर्वरकों एवं कृषि रसायनों के उपयोग की जानकारी दी, जिससे मृदा स्वास्थ्य एवं उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. रवि प्रकाश दुबे, कुलपति, रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल ने कहा कि कृषि मानव जीवन की आधारशिला है और देश की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा, वर्तमान कृषि चुनौतियों तथा उन्नत एवं संयुक्त कृषि तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।
तकनीकी सत्र में सहायक संचालक कृषि श्री सुनील कुमार सोने (रायसेन) ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, प्राकृतिक खेती परियोजना एवं जीवामृत, बीजामृत जैसी तकनीकों की जानकारी दी। उप संचालक कृषि श्री एच. ओंकार (सीएट, भोपाल) ने पीएम एवं सीएम समृद्धि योजना, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, पराली प्रबंधन तथा ड्रोन तकनीक पर प्रकाश डाला। वहीं पशुपालन विभाग के उप संचालक डॉ. नीरज सिंह परिहार ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण एवं पशु स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी साझा की।
प्रश्नोत्तर सत्र में किसानों ने खेती एवं पशुपालन से संबंधित समस्याएँ विशेषज्ञों के समक्ष रखीं, जिनका समाधान किया गया। कार्यक्रम के अंत में कृषि संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
यह कार्यक्रम किसानों को शासकीय योजनाओं, नवीन कृषि एवं पशुपालन तकनीकों से जोड़ने तथा सतत एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की एक सार्थक पहल सिद्ध हुआ।
















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