शिशिर उपाध्याय
तिल-तिल कर के आज से,
बढ़े सूर्य का ओज,
कहती है माँ शारदा,
कहते राजा भोज ।।
धीरे-धीरे सूर्य की,
लपटें होंगीं तेज़,
तिल की गजक, मिठाइयाँ
पडौसियों को भेज ।।
पहन नथनिया नाक में,
रख मुख पर मुस्कान ।
माथे पर सूरज उगा,
रख सविता का मान ।।
खुशियों की पतंग उड़े,
जाए सूरज पास ।
बना रहे घर मे” शिशिर”
सदा हास-परिहास ।।













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