ओमप्रकाश चौरे
मेरे प्यारे भारतवासी,
हमने आजादी ऐसे नही पाई है।
आजाद‘ को खोकर,
हमने आजादी पाई है।
मेरे प्यारे भारतवासी,
हमने आजादी ऐसे नही पाई है।
मॉ के ‘भगत‘ को फॉसी झुलाकर
हमने आजादी पाई है।
मेरे प्यारे भारतवासी,
हमने आजादी ऐसे नही पाई है।
वीर शहीदो के बलिदाने का
कर्ज हमे चुकाना है।
मेरे प्यारे भारतवासी,
हमने आजादी ऐसे नही पाई है।
सीना चीर देना तुम दुश्मन का
जो अब ऑख उठाये तो
मेरे प्यारे भारतवासी,
हमने आजादी ऐसे नही पाई है।
खण्डवा













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