भोपाल। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य,गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि “संभावना” का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 10 मई, 2026 को संतकुमार यहके एवं साथी, सिवनी द्वारा गोण्ड जनजातीय गेड़ी नृत्य, दिव्या सिंह चौहान एवं साथी,ग्वालियर द्वारा लांगुरिया नृत्य, राम भावसार एवं साथी, शाजापुर द्वारा भक्ति गायन, दिपाशा यादव एवं साथी खंडवा द्वारा निमाड़ी गायन की प्रस्तुति दी गई।
गतिविधि में राम भावसार एवं साथी, शाजापुर द्वारा भक्ति गायन में गणेश वंदना-सखी प्रथम मनाऊं गणधीश ने जी…, ज्वाला देवी आसान- आओ जगदंबे म्हारियां अवंती सहित पावना…, जल जमना रो पानी…, झुक रही पहाड़ के माय…, आरी दे जा दई को दान…, दई दीजो रे बंसी वाला म्हारो कजरो…, बंसी बजी रे कान्हा तेरी मदन गोपाल एवं अन्य भजनों की प्रस्तुति दी। इसके बाद दिपाशा यादव एवं साथी खंडवा द्वारा निमाड़ी गायन में गौरी गणेश ख मना वां गा हम गौरी गणेश ख मना वां गा…, थारो निर्मल निर्मल पाणी नरबदा महारानी महारानी…, सिंगाजी न लियो अवतार…, बन्ना जी तुम बम्बई जाजोजी…, रंग बरसा रे गुलाल बरस…, नरबदा हो थारो बनी गयो बांध काई लाया न कई लई…, जैसे अन्य लोक गीतों की प्रस्तुति दी।
गतिविधि में संतकुमार यहके एवं साथी, सिवनी द्वारा गोण्ड जनजातीय गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी। मुरिया जनजाति के मुख्य पर्व-त्यौहार में नवाखानी, जाड़, जात्रा और सेषा प्रमुख हैं। प्रत्येक व्यक्ति नृत्य गीत में समान रूप से दक्ष होते हैं। ककसार धार्मिक नृत्य-गीत है। वर्ष में एक बार ककसार पर्व होता है। इस अवसर पर गाए जाने वाले गीत को ककसार पाटा कहते हैं। यह गांव के धार्मिक स्थल पर होता है। मुरिया लोगों में यह माना जाता है कि लिंगोदेव (शंकर) के पास अठारह वाद्य थे। उन्होंने सभी वाद्य मुरिया लोगों को दे दिये। उसके बाद मुरिया अठारह में से उपलब्ध सभी वाद्यों के साथ ककसार में लिंगोदेव को प्रसन्न करने के लिए गाते-बजाते हैं। रात में देवता की साज-सज्जा की जाती है और रात भर युवाओं द्वारा नृत्य किया जाता है। नृत्य के समय युवा पुरूष अपनी कमर में पीतल अथवा लोहे की घंटियां बांधे होते हैं। हाथ में छतरी और सिर पर सजावट कर वे नृत्य करते हैं। गेडी नृत्य जिसे मुरिया लोग ‘डिटोंग पाटा’ कहते हैं, लकड़ी की गेडी पर किया जाता है। इसमें केवल नृत्य होता है गीत नहीं गाये जाते। गेंडी नृत्य अत्यधिक गतिशील नृत्य है। वहीं दिव्या सिंह चौहान एवं साथी,ग्वालियर द्वारा लांगुरिया नृत्य की प्रस्तुति दी। लांगुरिया नृत्य राजस्थान के करौली जिले में कैला देवी के मेले में किया जाने वाला एक प्रमुख भक्तिपूर्ण और सामूहिक लोकनृत्य है। यह नृत्य हनुमान जी (जिन्हें स्थानीय स्तर पर लांगुरिया कहा जाता है) को समर्पित गीतों की धुन पर स्त्री-पुरुषों द्वारा किया जाता है। राजस्थान सहित यह नृत्य मध्यप्रदेश के चंबल में भी किया जाता है। यह नवरात्रों में आयोजित होने वाले लक्खी मेले का प्रमुख आकर्षण भी माना जाता है।
मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय़ में हर रविवार को दोपहर 02 बजे से आयोजित होने वाली इस गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा।

















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