भोपाल। कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा आयोजित मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला का शुभारंभ डॉ. अमोघ गुप्ता के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इसके अंतर्गत भोपाल में एक भव्य एवं भावपूर्ण लोक गायन संध्या का आयोजन हुआ। यह विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम समरज्ञ कबीर फाउंडेशन एवं अक्षदा सोशल वेल्फेयर सोसाइटी के सहयोग से कुबेर बैंक्वेट, बाग मुगालिया, भोपाल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में लोक संगीत के विविध रंगों ने उपस्थित दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा समरज्ञ कबीर फाउंडेशन एवं अक्षदा सोशल वेल्फेयर सोसाइटी के सहयोग से प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को कुबेर बैंक्वेट में मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों का उद्देश्य भारतीय लोक परंपराओं, संगीत एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, संवर्धन एवं नई पीढ़ी तक उनका प्रसार करना है।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण पद्मश्री से सम्मानित सुप्रसिद्ध लोक गायक डॉक्टर कालूराम बामनिया रहे, जिन्होंने अपनी विशेष प्रस्तुति से पूरे सभागार को लोक संगीत के रंग में रंग दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत मालवी और निर्गुण लोक भजनों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कबीर, लोक जीवन और भारतीय संस्कृति से जुड़े गीतों की प्रस्तुति दी, जिनमें लोक चेतना और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
प्रस्तुति के दौरान उन्होंने अपने प्रसिद्ध निर्गुण भजनों की पंक्तियाँ – “मन लागो मेरो यार फकीरी में…” और“उड़ जाएगा हंस अकेला, जग दर्शन का मेला…”
गाकर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके साथ ही उन्होंने मालवा अंचल की लोक परंपराओं से जुड़े गीतों को भी अपनी सहज और मधुर शैली में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने तालियों की गूंज के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। लोक गायन की इस संध्या में लोक संस्कृति की आत्मा और भारतीय जीवन दर्शन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिंतक एवं विचारक डॉ. अमोघ गुप्ता रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय लोक संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक चेतना और लोक जीवन का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में लोक परंपराओं को बचाए रखना अत्यंत आवश्यक है और इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री 2026 के लिए चयनित वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास ने की। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत केवल स्मारकों और पुरातात्विक धरोहरों में ही नहीं, बल्कि लोक गीतों, लोक कथाओं और लोक कलाओं में भी सुरक्षित है। उन्होंने लोक कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती हैं।
इस अवसर पर मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला के बारे में जानकारी देते हुए आलोक शर्मा ने बताया कि कलाव्योम फाउंडेशन द्वारा नियमित रूप से संगीत, नृत्य, नाट्य एवं लोक कलाओं पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजन करना नहीं, बल्कि लोक कलाकारों को मंच प्रदान करना और समाज में सांस्कृतिक चेतना का विस्तार करना भी है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी विभिन्न लोक कलाओं एवं युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष आयोजन किए जाएंगे।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन चित्रांश खरे ने किया। उन्होंने अपनी सशक्त एवं सहज शैली में कार्यक्रम की विभिन्न प्रस्तुतियों को दर्शकों से जोड़े रखा। वहीं कार्यक्रम के अंत में कवि डॉक्टर अरुण ख़ोबरे ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी अतिथियों, कलाकारों, सहयोगी संस्थाओं एवं उपस्थित नागरिकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समाज में सांस्कृतिक वातावरण बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर आवश्यकता है।
कार्यक्रम में निहारिका धोलपुरिया, रितेश धोलपुरिया सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता, संगीत अनुरागी एवं नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में लोक संस्कृति, संगीत और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश प्रभावी रूप से देखने को मिला। यह आयोजन भोपाल की सांस्कृतिक गतिविधियों में एक यादगार और प्रेरणादायी आयोजन के रूप में सराहा जा रहा है।
आयोजन में बड़ी संख्या में उपस्थित कला प्रेमियों और संगीत अनुरागियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे भारतीय लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

















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