भोपाल। मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में उर्दू ड्रामा फ़ेस्टिवल का शुभारम्भ दिनाँक 25 मार्च, 2026 को सायं 7.00 बजे जनजातीय संग्रहालय सभागार, श्यामला हिल्स, भोपाल में उर्दू नाटक नज़ीरनामा के साथ हुआ।
उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने उर्दू ड्रामा फ़ेस्टिवल के उद्घाटन अवसर पर कहा कि उर्दू नाटक की परंपरा अत्यंत प्राचीन है और यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त सामाजिक और साहित्यिक अभिव्यक्ति भी है। यूनानी परंपरा से लेकर भरतमुनि के नाट्यशास्त्र तक और पारसी थिएटर से आधुनिक मंच तक, नाटक ने समाज को दिशा देने का कार्य किया है। इसी कार्य को उर्दू भाषा में उर्दू के लेखकों ने सफलतापूर्वक संपन्न किया है। इस फेस्टिवल में प्रस्तुत नाटक इस बात का प्रमाण हैं क्योंकि ये सामाजिक सरोकारों, पारिवारिक संबंधों, संवादहीनता, मानवीय मूल्यों और नैतिक प्रश्नों को सरल और प्रभावी ढंग से सामने लाते हैं। हमें विश्वास है कि यह फेस्टिवल न केवल दर्शकों के लिए यादगार सिद्ध होगा, बल्कि उर्दू नाटक के विकास की एक लंबी यात्रा को भी सामने लाएगा।
उद्घाटन दिवस पर सागर गुंचा नटरंग कल्चरल एवं वेलफेयर सोसायटी, भोपाल की प्रस्तुति नाटक “नज़ीरनामा” के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि “नज़ीरनामा” एक नाट्य-प्रयोग है, जिसमें महान शायर नज़ीर अकबराबादी के जीवन, विचार और काव्य संसार को क़िस्सागोई (दास्तानगोई) के अंदाज़ में मंचित किया गया है। उनकी नज़्मों और बंदों की जीवंतता को नाटक के माध्यम से प्रस्तुत करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा, जिसे रचनात्मक रूप से कथा और अभिनय के सहारे साकार किया गया है।
यह नाटक केवल उनके जीवन की घटनाओं का चित्रण नहीं, बल्कि उनकी सोच, मानवीय दृष्टिकोण और आम आदमी के जीवन से उनके गहरे जुड़ाव को भी सामने लाता है। नाटक के माध्यम से यह अनुभूति होती है कि नज़ीर अकबराबादी का साहित्य किसी एक वर्ग, धर्म या परंपरा तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता का प्रतिनिधित्व करता है।इस नाटक का लेखन, निर्देशन एवं परिकल्पना बिशना चौहान द्वारा किए गए हैं एवं संगीत श्रुति धर्मेश का है तथा मंच पर मुख्य कलाकारों में योगेश तिवारी, संदीप शर्मा, निर्मल तिवारी, दीपक तिवारी, गुंजन मालवीय, ऋषिका ठाकुर, प्रवीण चौबे, नितेश यादव, विनय सपकाले, अक्षत सिंह, मिष्टी श्रीवास्तव एवं ख़ुशबू चौबितकर आदि के नाम शामिल हैं एवं सेट डिज़ाईन में दिनेश नायर तथा लाइट डिज़ाइन में आदर्श शर्मा के नाम शामिल हैं। ड्रामा फ़ेस्टिवल के दूसरे दिन 26 मार्च, 2026 को सायं 7.00 बजे अदाकार, भोपाल द्वारा नाटक जल कुकड़े का मंचन होगा जिसके लेखक हैं रफ़ी शब्बीर, डिज़ाइन एवं निर्देशन है फ़र्रुख़ शेर ख़ान का और संगीत श्रुति धर्मेश का है।
डॉ नुसरत मेहदी ने नाटक के अंत में तमाम अतिथियों कलाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
















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