भोपाल। मध्यप्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन और भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित “एमपी एआई इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस 2026” के दौरान ‘एआई लिटरेसी मिशन’ का औपचारिक शुभारंभ किया। यह मिशन आईसेक्ट (AISECT) द्वारा राज्य सरकार के सहयोग से प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति जागरूक और दक्ष बनाना है। कार्यक्रम के दौरान आईसेक्ट और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (MPSEDC) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका मुख्य उद्देश्य “मध्यप्रदेश के युवाओं में एआई साक्षरता एवं क्षमता निर्माण” है। इस समझौते के अंतर्गत आईसेक्ट ‘कौशल रथ’ के माध्यम से एआई लिटरेसी मिशन को प्रदेशभर में प्रभावी रूप से लागू करेगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश के लगभग 1 करोड़ विद्यार्थियों को एआई तकनीक में प्रशिक्षित करने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कौशल रथ’—एक अत्याधुनिक मोबाइल एआई लैब—को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह मोबाइल कंप्यूटर लैब प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाकर स्थानीय आईटीआई, महाविद्यालयों तथा पीएम श्री और सीएम राइज स्कूलों में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान करेगी। कौशल रथ की यात्रा की शुरुआत भोपाल से हुई है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में विकास और रोजगार की दिशा तय करेगा। ऐसे में यह आवश्यक है कि मध्यप्रदेश का युवा केवल तकनीक का उपभोक्ता न बने, बल्कि उसका निर्माता और नेतृत्वकर्ता भी बने। एआई लिटरेसी मिशन इस दिशा में राज्य के लिए एक निर्णायक कदम है।
सम्मेलन में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, इंडिया एआई के सीईओ श्री अभिषेक सिंह सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इस अवसर के साथ ही मध्यप्रदेश ने एआई आधारित विकास मॉडल की ओर ठोस कदम बढ़ाया है।
इस अवसर पर आईसेक्ट के कार्यकारी उपाध्यक्ष और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि कौशल रथ के माध्यम से भविष्य के डिजिटल कौशल सीधे ग्रामीण संस्थानों तक पहुँचाए जा रहे हैं। यह पहल डिजिटल डिवाइड को कम करने के साथ-साथ युवाओं को तकनीक-आधारित करियर के लिए तैयार करेगी।
आईसेक्ट द्वारा संचालित यह कौशल रथ एक सुनियोजित मार्ग के तहत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में भ्रमण करेगा। भोपाल के बाद यह मोबाइल लैब सीहोर, देवास, खंडवा और हरदा जिलों में जाएगी, तत्पश्चात नर्मदापुरम (होशंगाबाद), रायसेन, विदिशा और अशोकनगर में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का समापन गुना और राजगढ़ जिलों में होगा।
प्रारंभिक चरण में आगामी तीन महीनों के भीतर 11 जिलों के लगभग 22,000 छात्रों, 1100 शिक्षकों और 220 सरकारी कर्मचारियों को एआई साक्षर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह मिशन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के उद्देश्यों के अनुरूप भविष्य के रोजगार और नवाचार की दिशा में युवाओं को तैयार करने का प्रयास है।

















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