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महाकाल वन मेला उज्जैन में छिंदवाड़ा के नाड़ी वैद्य श्री प्रीतम डोंगरे को किया गया तृतीय पुरस्कार से सम्मानित

छिन्दवाडा : श्री महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित महाकाल वन मेला में छिन्दवाड़ा जिले के मोहखेड़ तहसील अंतर्गत तंसरामाल गांव के नाड़ी वैद्य श्री प्रीतम डोंगरे को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें दुर्लभ जड़ी-बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक औषधियों के लिए प्रदान किया गया।

      कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एम.एफ.पी. पार्क द्वारा निर्मित प्राकृतिक “होली रंग गुलाल” एवं “महाकाल स्मृति उपहार” का विमोचन किया। इसके बाद प्रदर्शनी अवलोकन के दौरान उन्होंने नाड़ी वैद्य श्री प्रीतम डोंगरे की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की सराहना की और उनके कार्य से प्रभावित होकर प्रशंसा व्यक्त की।

      कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक डॉ. समिता राजौरा द्वारा वन मंडल पांढुर्णा के कन्हान वन परिक्षेत्र अंतर्गत संचालित श्री बंजारी स्व-सहायता समूह से जुड़े नाड़ी वैद्य श्री प्रीतम डोंगरे को सम्मानित किया गया। श्री डोंगरे द्वारा दुर्लभ जड़ी-बूटियों के माध्यम से तैयार अचूक तेल एवं मस्सा लेप आयुर्वेदिक औषधि के रूप में मरीजों के लिए लाभदायक साबित हुए हैं, जिसके लिए उन्हें महाकाल वन मेला उज्जैन की ओर से तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

      प्रदेश स्तर पर इस उपलब्धि पर छिंदवाड़ा सीसीएफ श्री कमल अरोरा, डीएफओ (वन मंडल-पांढुर्णा श्री सचिन, श्री एच. नटगढ़ी (आईएफएस), जैव विविधता संरक्षण के एमआरपी श्री कैलाश सोनेवार एवं बीएमओ मोहखेड़ डॉ. संजय राय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री प्रीतम डोंगरे की प्रशंसा की।

      महाकाल वन मेला का आयोजन वनवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली अकाष्ठीय वनोपज के प्रदर्शन, संरक्षण, संवर्धन, प्रसंस्करण एवं विपणन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया था। यह मेला प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ।

      जैव विविधता संरक्षण के मास्टर ट्रेनर श्री कैलाश सोनेवार ने बताया कि अकाष्ठीय वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी हुई है। उल्लेखनीय है कि महाकाल वन मेला के फूड जोन में छिंदवाड़ा का वन भोज रसोई विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

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