डॉ. योगिता राठौड़
आज का विश्व एक बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर है, जहाँ शक्ति का केंद्र केवल कुछ देशों तक सीमित नहीं रह गया है। ऐसे परिवर्तित वैश्विक परिदृश्य में भारत एक उभरती हुई शक्ति के रूप में अपनी सशक्त और संतुलित उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आर्थिक विकास, कूटनीतिक कौशल, सामरिक मजबूती और सांस्कृतिक प्रभाव—इन सभी क्षेत्रों में भारत ने अपने प्रभाव का विस्तार किया है। वर्तमान समय में भारत की भूमिका न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक राजनीति में भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत की विदेश नीति का मूल आधार “पंचशील”, “गुटनिरपेक्षता” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसे सिद्धांत रहे हैं। हालांकि, समय के साथ भारत ने अपनी विदेश नीति में व्यावहारिकता (Pragmatism) को भी स्थान दिया है। आज भारत एक ओर अमेरिका, रूस, यूरोप और जापान जैसे शक्तिशाली देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर विकासशील देशों के हितों का भी प्रतिनिधित्व करता है। यह संतुलन भारत को वैश्विक मंच पर एक विश्वसनीय और जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को समझने के लिए उसकी आर्थिक प्रगति पर ध्यान देना आवश्यक है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। “मेक इन इंडिया”, “डिजिटल इंडिया” और “स्टार्टअप इंडिया” जैसी पहलों ने भारत को निवेश और नवाचार का केंद्र बना दिया है। आर्थिक मजबूती ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभावशाली बनाया है, जिससे वह वैश्विक आर्थिक नीतियों के निर्माण में सक्रिय भागीदारी कर पा रहा है।
भारत की कूटनीति (Diplomacy) भी उसकी वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत ने “Neighbourhood First” और “Act East Policy” के माध्यम से अपने पड़ोसी देशों और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने संबंधों को मजबूत किया है। साथ ही, “G20” जैसे मंचों पर भारत की सक्रियता यह दर्शाती है कि वह वैश्विक मुद्दों—जैसे आर्थिक स्थिरता, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास—पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” का संदेश देकर वैश्विक एकता और सहयोग का मार्ग प्रशस्त किया।
सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और उसकी सैन्य क्षमता निरंतर मजबूत हो रही है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की पहल ने उसे एक जिम्मेदार और सजग राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। इसके अतिरिक्त, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों (UN Peacekeeping Missions) में भी सक्रिय भागीदारी करता है, जो उसकी वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर भारत की भूमिका सराहनीय रही है। “अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन” (International Solar Alliance) की पहल भारत ने ही की, जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है। भारत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है, जो अन्य देशों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही, भारत सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) के माध्यम से भी भारत ने अपनी वैश्विक पहचान को मजबूत किया है। योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रभाव आज विश्वभर में देखा जा सकता है। “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस” इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जिसने भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है।
हालांकि, भारत के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। चीन के साथ सीमा विवाद, पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता, वैश्विक आर्थिक असमानता और जलवायु संकट जैसी समस्याएँ भारत की विदेश नीति के लिए जटिल परिस्थितियाँ उत्पन्न करती हैं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने की भारत की आकांक्षा अभी तक पूरी नहीं हो पाई है, जो उसकी वैश्विक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत ने अपनी रणनीतिक सोच और कूटनीतिक संतुलन के माध्यम से वैश्विक राजनीति में अपनी भूमिका को निरंतर मजबूत किया है। “सॉफ्ट पावर” और “हार्ड पावर” के संतुलित उपयोग ने भारत को एक प्रभावशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। भारत न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है, बल्कि वैश्विक शांति, सहयोग और विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका दिन-प्रतिदिन महत्वपूर्ण होती जा रही है। एक जिम्मेदार, संतुलित और दूरदर्शी राष्ट्र के रूप में भारत विश्व को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। आने वाले वर्षों में, भारत न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति बल्कि एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकता है, जो विश्व शांति, समृद्धि और सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगा।

















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