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आत्ममंथन संकल्प के साथ मनाए नवचेतना का पर्व

डाॅ. योगिता राठौड़

नव वर्ष केवल कैलेंडर का बदलना नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में आशा, उत्साह और नवचेतना के संचार का प्रतीक है। जैसे ही पुराना वर्ष विदा लेता है, उसके साथ बीते अनुभव, सफलताएँ, असफलताएँ, सीख और स्मृतियाँ भी हमारे मन में सहेज ली जाती हैं। नया वर्ष हमें एक नई शुरुआत का अवसर देता है—अपने अतीत का मूल्यांकन करने, वर्तमान को समझने और भविष्य को संवारने का। यही कारण है कि नव वर्ष को केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का पर्व कहा जाता है।

वर्तमान समय में नव वर्ष का महत्व और भी बढ़ गया है। आज का मानव तेज़ी से बदलती जीवनशैली, तकनीकी प्रगति, सामाजिक चुनौतियों और वैश्विक अस्थिरताओं के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में नया वर्ष हमें रुककर सोचने का अवसर देता है कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं। क्या हमारी प्रगति केवल भौतिक सुखों तक सीमित है, या हम मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संतुलन को भी समान महत्व दे रहे हैं?

नव वर्ष का पहला संदेश होता है—आशा। निराशा और असफलता चाहे जितनी गहरी क्यों न हो, नया वर्ष यह विश्वास जगाता है कि परिवर्तन संभव है। यही आशा व्यक्ति को फिर से खड़े होने, नए लक्ष्य तय करने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। विद्यार्थी हों या कर्मचारी, किसान हों या उद्यमी—नव वर्ष सभी के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

नव वर्ष का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है—आत्ममंथन। बीते वर्ष में हमने क्या खोया और क्या पाया, यह प्रश्न स्वयं से पूछना आवश्यक है। आत्ममंथन के बिना संकल्प केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। हमें यह देखना होगा कि हमारे विचार, व्यवहार और कर्म समाज व राष्ट्र के लिए कितने उपयोगी रहे। क्या हमने केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति की, या समाज के कमजोर वर्गों के लिए भी कुछ किया? आत्ममंथन ही हमें बेहतर इंसान बनने की दिशा में ले जाता है।

नव वर्ष संकल्पों का समय भी है। प्रायः लोग स्वास्थ्य सुधारने, समय का सदुपयोग करने, बुरी आदतें छोड़ने या करियर में आगे बढ़ने के संकल्प लेते हैं। किंतु संकल्प तभी सार्थक होते हैं जब वे व्यवहार में उतरें। आज आवश्यकता है कि व्यक्तिगत संकल्पों के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक संकल्प भी लिए जाएँ—जैसे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, ईमानदारी, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान। छोटे-छोटे संकल्प यदि ईमानदारी से निभाए जाएँ, तो वे बड़े परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।

नव वर्ष का सामाजिक संदर्भ भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज समाज अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है—आर्थिक विषमता, बेरोजगारी, तनाव, हिंसा और नैतिक मूल्यों का क्षरण। ऐसे में नया वर्ष हमें सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है। हमें यह समझना होगा कि व्यक्तिगत सुख तभी स्थायी हो सकता है, जब समाज समृद्ध और संतुलित हो।

पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी नव वर्ष विशेष महत्व रखता है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन मानव अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। नया वर्ष हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बोध कराता है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, ऊर्जा की बचत और प्लास्टिक के कम उपयोग जैसे छोटे कदम बड़े पर्यावरणीय संकट को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

शिक्षा और युवाओं के संदर्भ में नव वर्ष नई ऊर्जा का संचार करता है। युवा वर्ग किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होता है। नया वर्ष युवाओं को सकारात्मक सोच, रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, विवेक और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी होना चाहिए।

नव वर्ष का सांस्कृतिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत जैसे देश में नव वर्ष विभिन्न रूपों में मनाया जाता है—चैत्र प्रतिपदा, बैसाखी, उगादी, गुड़ी पड़वा आदि। यह विविधता हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है। नव वर्ष हमें अपनी परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर देता है, ताकि आधुनिकता के साथ-साथ अपनी जड़ों को भी मजबूत रखा जा सके।

अंततः नव वर्ष का वास्तविक अर्थ तभी साकार होता है, जब हम इसे केवल उत्सव तक सीमित न रखें। आतिशबाज़ी, पार्टियाँ और शुभकामनाएँ क्षणिक आनंद दे सकती हैं, किंतु स्थायी सुख और संतोष कर्म, करुणा और कर्तव्य से ही प्राप्त होता है। नया वर्ष हमें यही सिखाता है कि परिवर्तन बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होता है।

निष्कर्षतः नववर्ष एक नई शुरुआत का प्रतीक है—आशा, संकल्प और नवचेतना का संदेश लेकर आता हुआ। यदि हम आत्ममंथन के साथ ठोस संकल्प लें, सामाजिक और नैतिक मूल्यों को अपनाएँ तथा प्रकृति और मानवता के प्रति अपने दायित्व को समझें, तो निश्चित ही नया वर्ष न केवल हमारे जीवन को, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को एक नई दिशा दे सकता है। यही नववर्ष की सच्ची शुभकामना और सार्थकता है।

प्राचार्य

माँ नर्मदा कॉलेज ऑफ एजुकेशन धामनोद

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