डॉ. योगिता सिंह राठौड़
भारत एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है, जहाँ विकास और परिवर्तन की रफ्तार तेज़ है। ऐसे समय में सबसे बड़ी ताकत, सबसे मूल्यवान संसाधन, सबसे महत्वपूर्ण पूँजी यदि कोई है, तो वह है युवा शक्ति। किसी भी देश की तरक्की केवल प्राकृतिक संसाधनों या आर्थिक पूँजी पर निर्भर नहीं होती, असली प्रगति तो तभी संभव है जब उसके पास ऊर्जावान, शिक्षित, जागरूक और सक्रिय युवा हों। भारत सौभाग्यशाली है कि यहाँ विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी है। आज देश की लगभग आधी जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है—यह सच अपने आप में गर्व और अवसर दोनों है।
युवा केवल आयु का एक चरण नहीं, बल्कि विचारों, सपनों, संघर्ष और नई सोच का प्रतीक है। उनमें बदलाव की इच्छा, जोखिम लेने का साहस और नये मार्ग खोजने की क्षमता स्वाभाविक रूप से होती है। यही कारण है कि इतिहास में चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो, सामाजिक सुधार आंदोलन हो या विज्ञान एवं तकनीकी क्रांति—हर महत्वपूर्ण परिवर्तन की धुरी युवाओं ने ही संभाली। वे केवल वर्तमान को नहीं देखते, वे भविष्य को रचते हैं। यदि बुजुर्ग अनुभव हैं, तो युवा ऊर्जा हैं; और जब अनुभव और ऊर्जा एक साथ चलते हैं, तो राष्ट्र सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करता है।
युवा शक्ति की संभावनाएँ
भारत के युवा आज शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता और तकनीक के क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं। स्टार्टअप संस्कृति का तेजी से बढ़ना इसका प्रमाण है। युवा आज नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन रहे हैं। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं ने युवाओं को बड़ा मंच दिया है। अंतरिक्ष से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तक, हर जगह भारतीय युवा अपनी प्रतिभा से दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं। ओलंपिक पदकों से लेकर वैश्विक वैज्ञानिक परियोजनाओं तक, भारत की नई पीढ़ी ने साबित किया है कि वह किसी भी राष्ट्र से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।
युवा नए विचारों का स्रोत हैं। वे परंपराओं का सम्मान करते हुए भी पुरानी सोच को चुनौती देने का साहस रखते हैं। यही विशेषता उन्हें समाज सुधारक बनाती है। वे भेदभाव, असमानता, भ्रष्टाचार और अंधविश्वास जैसी समस्याओं के खिलाफ आवाज़ उठाने में अग्रणी हैं। जब युवा जागरूक होते हैं, तो समाज जागरूक होता है; और जब समाज जागरूक होता है, तो राष्ट्र प्रगति की राह पर बढ़ता है।
चुनौतियाँ जो युवा शक्ति को दिशा से भटका सकती हैं
हालाँकि हर शक्ति की तरह युवा शक्ति भी तभी सार्थक है जब उसे सही मार्ग मिले। आज का युवा कई सामाजिक और मानसिक चुनौतियों से जूझ रहा है। बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है, जिसके कारण कई युवा अवसाद, चिंता और असुरक्षा से घिर जाते हैं। सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया की लत भी युवाओं को वास्तविक जीवन से दूर कर रही है। मूल्य आधारित शिक्षा और नैतिक मार्गदर्शन की कमी युवाओं को संभावनाओं से भटका सकती है। इसके अलावा नशे का बढ़ता प्रसार भी कई युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।
इन चुनौतियों का समाधान केवल नीतियों के स्तर पर नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी आवश्यक है। शिक्षा प्रणाली में केवल डिग्री नहीं, बल्कि जीवन कौशल, नैतिकता, नेतृत्व क्षमता और समस्या समाधान जैसे गुणों का समावेश होना चाहिए। माता-पिता और शिक्षक युवाओं के लिए मार्गदर्शक, सहायक और प्रेरक बनें, न कि केवल अपेक्षाओं का भार थोपने वाले। जब युवा मानसिक रूप से सशक्त होंगे, तभी वह राष्ट्र के लिए प्रभावशाली योगदान दे पाएंगे।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका
राष्ट्र निर्माण कोई एक दिन का या एक संस्था का कार्य नहीं है। यह निरंतर प्रक्रिया है जिसमें युवाओं की भागीदारी अनिवार्य है। वे लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं, नीति निर्माण में सहभागिता करते हैं, सामाजिक आंदोलनों में अग्रणी होते हैं और विकास योजनाओं को गति देते हैं। स्वच्छ भारत अभियान हो, जल संरक्षण, डिजिटल साक्षरता, ग्रामीण विकास, महिला सुरक्षा या पर्यावरण संरक्षण—हर क्षेत्र में युवाओं की सक्रियता परिवर्तन ला सकती है। यदि युवा संकल्प करें कि वे भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और सामाजिक बुराइयों को स्वीकार नहीं करेंगे, तो देश की दिशा बदलने में समय नहीं लगेगा।
युवा केवल रोजगार पाने वाले नागरिक नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माता हैं। यदि वे अपने कौशल, रचनात्मकता और नवाचार का उपयोग करें तो भारत न केवल आर्थिक महाशक्ति बन सकता है, बल्कि मानव मूल्यों और नैतिक शक्ति में भी अग्रणी हो सकता है। परंतु इसके लिए युवाओं में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना आवश्यक है।
सरकार, समाज और युवा – तीनों का सामूहिक प्रयास आवश्यक
युवा शक्ति को राष्ट्र की असली पूँजी बनाने के लिए सरकार, समाज और युवाओं को एक साथ मिलकर कार्य करना होगा।
सरकार का दायित्व है कि वह शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराए।
समाज का कर्तव्य है कि वह युवा प्रतिभाओं को पहचानने, प्रोत्साहित करने और सही दिशा देने में सहयोग करे।
युवा का उत्तरदायित्व है कि वह समय की कीमत समझे, अनुशासन अपनाए, सकारात्मक सोच विकसित करे और राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखे।
जब यह तीनों पक्ष एक साथ कार्य करेंगे, तब भारत विश्व में केवल युवा देश ही नहीं, बल्कि सबसे सशक्त और विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
युवा वास्तव में किसी राष्ट्र की असली पूँजी हैं—ऐसी पूँजी जो जितनी अधिक उपयोग में लाई जाए, उतनी ही अधिक बढ़ती है। वे केवल कल का भविष्य नहीं, बल्कि आज की ताकत हैं। यदि इस शक्ति को अवसर, दिशा और प्रेरणा मिले तो देश किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। युवा ऊर्जा, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के सहारे भारत विश्वगुरु बनने की राह पर तेज़ गति से आगे बढ़ सकता है। अब ज़रूरत है युवाओं को यह समझने की—कि उनका हर प्रयास, हर विचार, हर सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का हिस्सा है।
क्योंकि जब युवा जागते हैं, तो राष्ट्र प्रगति करता है
और जब युवा आगे बढ़ता है—तो भारत आगे बढ़ता है।
प्राचार्य
माँ नर्मदा कॉलेज ऑफ एजुकेशन धामनोद

















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